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Mission Shakti Phase 5.0: बेटी ने संभाली प्रिंसिपल की कुर्सी, पूरे स्कूल में खुशी का माहौल

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Mission Shakti Phase 5.0: बेटी ने संभाली प्रिंसिपल की कुर्सी, पूरे स्कूल में खुशी का माहौल

मिशन शक्ति 5.0: छात्रा आशियाना खातून बनी एक दिन की प्रधानाचार्य, बढ़ा बेटियों का आत्मविश्वास

सादात। बेटियों के आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे मिशन शक्ति 5.0 अभियान के तहत समाज में लगातार सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को क्षेत्र के बहरियाबाद स्थित सुभाष विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में पढ़ने वाली कक्षा 12 की छात्रा आशियाना खातून को एक दिन का प्रधानाचार्य बनाया गया। यह क्षण न केवल विद्यालय के लिए गर्व का था, बल्कि छात्राओं के लिए प्रेरणा का भी स्रोत बना।

सुबह की शुरुआत और पदभार ग्रहण

सुबह 8:50 बजे विद्यालय के नियमित प्राचार्य रामप्रकाश जी ने आशियाना खातून को एक दिन के लिए प्रधानाचार्य का पदभार सौंपा। औपचारिक रूप से जिम्मेदारी मिलने के बाद आशियाना ने सबसे पहले सूचना रजिस्टर पर हस्ताक्षर किए और यह संदेश दिया कि बेटियाँ भी किसी जिम्मेदारी को बखूबी संभाल सकती हैं।

सुभाष विद्या मंदिर इण्टर कालेज

विद्यालय का वातावरण इस मौके पर बेहद उत्साहपूर्ण रहा। सहपाठी, शिक्षक और अन्य स्टाफ ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया।

पूरे दिन की जिम्मेदारियाँ

प्रधानाचार्य बनने के बाद आशियाना ने विद्यालय की विभागीय और प्रशासनिक गतिविधियों का संचालन किया।

  • उन्होंने शिक्षकों की उपस्थिति की जांच की।

  • कक्षाओं का निरीक्षण किया।

  • बच्चों से अनुशासन और पढ़ाई पर बातचीत की।

  • स्कूल की आवश्यकताओं और संसाधनों पर सुझाव दिए।

यह अनुभव आशियाना के लिए जीवन का एक अनमोल क्षण था।

मिशन शक्ति का उद्देश्य

विद्यालय प्रबंधक अजय सहाय ने कहा कि मिशन शक्ति का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन सुनिश्चित करना है। इस अभियान के तहत बालिकाओं को महत्वपूर्ण दायित्व सौंपकर उनके मानसिक सशक्तिकरण और नेतृत्व क्षमता को विकसित किया जा रहा है।

यह कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि यदि अवसर मिले तो बेटियाँ हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती हैं।

समाज के लिए प्रेरणा

आशियाना खातून का एक दिन का यह अनुभव न सिर्फ उनके लिए खास रहा बल्कि पूरे विद्यालय की छात्राओं के लिए प्रेरणादायी संदेश भी बन गया।

  • उन्हें महसूस हुआ कि नेतृत्व की कुर्सी पर बेटियाँ भी बैठ सकती हैं।

  • जिम्मेदारी संभालते समय वे भी उतनी ही गंभीर और सक्षम हैं जितना कोई और।

  • इससे विद्यालय की अन्य छात्राओं में भी आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने शिक्षा और करियर के प्रति और गंभीर होने का संकल्प लिया।

मिशन शक्ति 5.0 की खास बातें

मिशन शक्ति का फेज 5.0 खासतौर से महिला सशक्तिकरण और बालिकाओं की आत्मनिर्भरता पर केंद्रित है।

  • इस अभियान के जरिए बालिकाओं को नेतृत्व भूमिकाओं में अवसर दिए जाते हैं।

  • समाज में यह संदेश दिया जाता है कि लड़कियाँ बोझ नहीं, बल्कि सामर्थ्य और क्षमता की पहचान हैं।

  • कार्यक्रमों के माध्यम से उनकी भागीदारी बढ़ाकर आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

शिक्षा और नेतृत्व का संगम

आशियाना खातून का यह अनुभव एक संदेश देता है कि शिक्षा केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिम्मेदारियाँ निभाने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का भी माध्यम है।

  • स्कूल स्तर पर ऐसे प्रयोग छात्राओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

  • जब बेटियाँ नेतृत्व का अनुभव करती हैं तो उनमें निर्णय लेने की क्षमता और आत्मविश्वास स्वतः बढ़ता है।

छात्राओं और अभिभावकों की प्रतिक्रिया

विद्यालय की छात्राओं ने इस पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह देखकर अच्छा लगा कि हमारी सहपाठी को इतना बड़ा अवसर मिला। कई छात्राओं ने व्यक्त किया कि वे भी भविष्य में ऐसे ही मौके की उम्मीद करती हैं।

अभिभावकों ने भी कहा कि ऐसे आयोजनों से बेटियों को आगे बढ़ने का रास्ता मिलता है और घर-परिवार में भी बेटियों की भूमिका को गंभीरता से लिया जाता है।

बेटियों का भविष्य और समाज की उम्मीद

आज जब देश और समाज महिला सशक्तिकरण की दिशा में लगातार काम कर रहा है, ऐसे आयोजनों की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है।

  • अगर बेटियों को जिम्मेदारी दी जाए तो वे समाज को दिशा देने का काम कर सकती हैं।

  • शिक्षा और नेतृत्व का साथ मिलकर बेटियों को भविष्य में बड़े पदों तक पहुंचने में मदद करता है।

  • आने वाले समय में ये ही बेटियाँ डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी या नेता बनकर समाज को नई दिशा देंगी।

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निष्कर्ष

मिशन शक्ति 5.0 के तहत आशियाना खातून का एक दिन का प्रधानाचार्य बनना सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह पूरे समाज को दिया गया एक बड़ा संदेश था कि बेटियाँ हर जिम्मेदारी संभालने में सक्षम हैं।

इस पहल से न केवल विद्यालय की छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ा, बल्कि समाज को भी यह समझाने का अवसर मिला कि बेटियों की शिक्षा और सशक्तिकरण ही भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है।

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